Weather Update 2026: बंगाल की खाड़ी में उठा निम्न दबाव का क्षेत्र अब एक गंभीर संकट का रूप ले चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 25 फरवरी 2026 से अगले 48 घंटों में यह ‘प्रचंड चक्रवाती तूफान’ मोंथा में तब्दील होकर पूर्वी तट की ओर बढ़ेगा। इस तूफान की भयावहता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम शुरू कर दिए हैं।
तूफान की वर्तमान स्थिति और रफ्तार
मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, चक्रवात मोंथा की गति और दिशा चिंता का विषय बनी हुई है:
- हवा की गति: लैंडफॉल के दौरान हवा की अधिकतम रफ्तार 110 किमी/घंटा तक पहुँच सकती है।
- लैंडफॉल का समय: यह शनिवार, 28 फरवरी की शाम को आंध्र प्रदेश के तट को पार करेगा।
- केंद्र बिंदु: तूफान के मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच, काकीनाडा के आसपास से गुजरने की प्रबल संभावना है।
5 राज्यों में दिखेगा असर: हाई अलर्ट जारी
चक्रवात मोंथा का प्रभाव केवल तटीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के आंतरिक राज्यों में भी भारी बारिश होगी:
- ओडिशा: राज्य के सभी 30 जिलों में हाई अलर्ट। दक्षिणी और तटीय जिलों में 20 सेमी से अधिक बारिश की आशंका।
- आंध्र प्रदेश: यहाँ सीधे लैंडफॉल होने के कारण राहत और बचाव की रणनीति पहले ही तैयार कर ली गई है।
- पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार: इन राज्यों में भी तूफान के असर से भारी बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान है।
प्रशासन की मुस्तैदी और सुरक्षा उपाय
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए NDRF और भारतीय सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासन ने निम्नलिखित कड़े कदम उठाए हैं:
- निकासी अभियान: जिला अधिकारियों को निचले और असुरक्षित इलाकों से लोगों को तुरंत निकालने के निर्देश दिए गए हैं।
- छुट्टियां रद्द: आपातकालीन स्थिति को देखते हुए संबंधित विभागों के सभी सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।
- कंट्रोल रूम: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राज्य सरकारें पल-पल की स्थिति पर करीबी नजर रख रही हैं।
- रेड और ऑरेंज अलर्ट: आईएमडी ने 27 और 28 फरवरी को ओडिशा के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में दोहरे तंत्र
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल बंगाल की खाड़ी ही नहीं बल्कि अरब सागर के मध्य-पूर्वी हिस्से में भी एक मौसम तंत्र सक्रिय हो रहा है। ये दो अलग-अलग सिस्टम मिलकर अगले 48 घंटों में मौसमी गतिविधियों को और अधिक तीव्र कर सकते हैं, जिससे समुद्र में ऊंची लहरें उठने और तटीय बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
सतर्क रहें: तटीय क्षेत्रों के निवासी सुरक्षित स्थानों पर रहें और प्रशासन द्वारा जारी की जा रही आधिकारिक चेतावनियों का पालन करें।