DA Hike Salary 2026: 8वें वेतन आयोग के गठन और केंद्रीय कर्मचारियों की मांगों को लेकर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बैठकों का दौर तेज हो गया है। हाल ही में नेशनल काउंसिल JCM (Joint Consultative Machinery) की ड्राफ्टिंग कमेटी की एक अहम बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में स्टाफ साइट के प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया और सरकार को सौंपे जाने वाले मांग पत्र (Memorandum) के प्रारूप पर विस्तार से चर्चा की। कर्मचारियों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि नया वेतन आयोग उनके जीवन स्तर में कितना सुधार लाएगा।
फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम वेतन: बैठक के मुख्य बिंदु
रेलवे कर्मचारियों की सबसे बड़ी यूनियन (AIRF) के जनरल सेक्रेटरी और स्टाफ साइट के वरिष्ठ नेता शिव गोपाल मिश्रा ने बैठक के बाद महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि लगभग 2 घंटे तक चली इस मीटिंग में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा हुई:
- फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor): नए वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर कितना रखा जाए, यह सबसे बड़ा सवाल है। कर्मचारियों की मांग है कि इसे पिछले आयोगों की तुलना में बढ़ाया जाए ताकि बेसिक सैलरी में सम्मानजनक वृद्धि हो।
- न्यूनतम वेतन (Minimum Wage): 8वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम मूल वेतन (Basic Pay) क्या तय किया जाए, इस पर भी मंथन हुआ।
- यूनिट की संख्या: महंगाई और परिवार की जरूरतों को देखते हुए यूनिट कैलकुलेशन के फार्मूले पर विचार किया गया।
- भत्ते (Allowances): नए पैटर्न में कौन-कौन से नए अलाउंस शामिल किए जाने चाहिए और मौजूदा भत्तों में कितनी वृद्धि हो, इस पर भी ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है।
10 मार्च के बाद होगी अगली निर्णायक बैठक
शिव गोपाल मिश्रा के अनुसार, हालांकि बैठक में 18 प्रमुख सवालों और बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया, लेकिन चर्चा अभी पूरी नहीं हुई है। कई तकनीकी पहलुओं पर और अधिक स्पष्टता की आवश्यकता है। इसके लिए 10 मार्च 2026 के बाद एक और बड़ी बैठक बुलाई गई है। इस अगली बैठक में ही मेमोरेंडम को अंतिम रूप दिया जाएगा और उसके बाद ही इसे आधिकारिक तौर पर सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
ऑटोनॉमस निकायों और केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारियों का मुद्दा
बैठक के दौरान एक और गंभीर विषय चर्चा का केंद्र रहा। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मनजीत पटेल ने JCM के ढांचे पर सवाल उठाते हुए कहा कि 1961 से स्थापित इस प्लेटफार्म में अभी भी केंद्रीय ऑटोनॉमस विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के कर्मचारियों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। उन्होंने मांग की कि सरकार इन विभागों के लाखों कर्मचारियों की आवाज को भी JCM के माध्यम से मुख्यधारा में शामिल करे, ताकि 8वें वेतन आयोग का लाभ समाज के हर वर्ग के कर्मचारी तक समान रूप से पहुँच सके।
निष्कर्ष और भविष्य की राह
8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारी संगठनों की सक्रियता दर्शाती है कि इस बार मेमोरेंडम में कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा और बढ़ती महंगाई को मुख्य मुद्दा बनाया गया है। यदि फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम वेतन की मांगों पर सहमति बनती है, तो यह देश के करोड़ों रेलकर्मियों, रक्षा कर्मियों और अन्य केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत होगी।