RBI Loan Yojana 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में बैंक ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण और कड़े फैसले लिए हैं। आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक में यह स्पष्ट किया गया है कि अब बैंकों की मनमानी और रिकवरी एजेंट्स के दुर्व्यवहार पर सख्त लगाम लगाई जाएगी। इसके साथ ही, डिजिटल युग में बढ़ते यूपीआई फ्रॉड (UPI Fraud) से निपटने के लिए भी नए प्रावधान किए गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता लाना और आम आदमी को मानसिक व आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।
लोन रिकवरी एजेंट्स के लिए सख्त और समान नियम
अक्सर देखा गया है कि लोन की ईएमआई (EMI) बकाया होने पर रिकवरी एजेंट्स द्वारा ग्राहकों को डराया-धमकाया जाता है। अब आरबीआई ने आदेश दिया है कि सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए रिकवरी के नियम एक समान होंगे। नियमानुसार, कोई भी एजेंट सुबह 8:00 बजे से शाम 7:00 बजे के बीच ही ग्राहक से संपर्क कर सकता है। गाली-गलौज, धमकी देना या रिश्तेदारों को लोन के बारे में बताना पूरी तरह गैरकानूनी है। यदि कोई बैंक इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो ग्राहक बैंकिंग लोकपाल (Banking Ombudsman) के पास ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
यूपीआई फ्रॉड पर मुआवजे का नया प्रावधान
डिजिटल भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए आरबीआई ने सुरक्षा का दायरा बढ़ाया है। यदि किसी यूजर के साथ यूपीआई के माध्यम से धोखाधड़ी होती है, तो विशेष परिस्थितियों में मुआवजे का प्रावधान किया गया है। नए नियमों के अनुसार, छोटे मूल्य के ट्रांजैक्शन (₹500 तक) पर होने वाले फ्रॉड के मामलों में सुरक्षा और मुआवजे की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। यह कदम डिजिटल लेन-देन के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ाने के लिए उठाया गया है। फ्रॉड होने की स्थिति में तुरंत अपने बैंक और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर सूचना देना अनिवार्य है।
एमएसएमई और किसानों के लिए कर्ज के रास्ते हुए आसान
आरबीआई ने छोटे कारोबारियों (MSME) और किसानों के लिए ऋण प्रक्रिया को और अधिक सुलभ बना दिया है। सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिए बिना किसी गारंटी (Collateral Free) मिलने वाले लोन की सीमा को बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है। यह नई सीमा 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। वहीं, किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने और ऋण वितरण को सरल करने के लिए एक नया पोर्टल लॉन्च किया जाएगा। इससे ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच और अधिक मजबूत होगी।
रेपो रेट स्थिर: ईएमआई पर क्या होगा असर
2026 की पहली एमपीसी बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट को स्थिर रखने का निर्णय लिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि वर्तमान में होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं होगी। हालांकि ब्याज दरों में कटौती भी नहीं की गई है, लेकिन स्थिर दरें मध्यम वर्ग के लिए राहत की बात है क्योंकि इससे उनकी मासिक ईएमआई का बोझ नहीं बढ़ेगा। बैंक ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और किसी भी वित्तीय विसंगति की स्थिति में आधिकारिक माध्यमों से अपनी आवाज उठाएं।